13.2.19

Paralysis से मुक्ति मात्र सात दिनों में - जानिये इस मंदिर के बारे में

हैलो दोस्तों आज में आपको बताने वाला हूं एक ऐसे मंदिर के बारे में जिसने विज्ञान को ही मात दी है इस मंदिर में सात परिक्रमा देने पर लकवाग्रस्त रोगी पुरणतया तैयार हो जाता है तो दोस्तों मेरी इस post को ध्यान से पढना और अपने दोस्तों परिवार और रिश्तेदारों के साथ शेयर जरूर करना.

राजस्थान का नाम शायद ही नहीं सुना होगा, आपने तो आज में परिचय करवा देता हूं कि राजस्थान भारत ( India ) देश का एक राज्य है. राजस्थान की सीमा एक तरफ pakistan से भी लगती है हरियाणा पंजाब दिल्ली गुजरात यह भी पङोसी राज्य है. राजस्थान शान्तिप्रिय राज्य है और इसमें 33 जिले है|इन जिलों में एक जिले का नाम है. नागौर और यह राजस्थान के दिल के नाम से प्रसिद्ध भी है. क्योंकि यह राजस्थान के बीचोंबीच पङता है इसके पड़ोसी जिले अजमेर सीकर पाली जोधपुर जयपुर चुरु यह जिले है.
नागौर से 40 km दूर अजमेर रोड पर कुचेरा गांव से आगे बुटाटी गांव है. इसी गांव में यह मंदिर बाबा श्री चतूरदासजी महाराज के नाम से जाना जाता है. और यहां लकवा (पैरालिसिस) के जो मरीज आते हैं वो आते अपनो के सहारे है लेकिन जाते खुद के सहारे, लकवे के मरीजों का यहां 100% इलाज होता है. यहाँ आपको सात दिनों के लिए रूखना जरूरी है मरीज को सुबह - शाम मंदिर में परिक्रमा लगानी रहती है सुबह शाम आरती होती है. उस टाईम मरीज को हवन कुंड की भभूति लगानी चाहिए.
लकवा रोगी के साथ दो परिजन साथ रहे सकते हैं. यहाँ रहना खाना सब नि:शुल्क होता है. आपको पहले दिन से ही सोने के लिये, अलग कमरा बिस्तर खाना बनाने के लिए आटा दाल और सब बर्तन यहां आपको फ्री मिलेंगे आप सात दिन यहां रहेगें तो ही पुरा फायदा मिलेगा क्योंकि सुबह शाम मंदिर में परिक्रमा और हवनकुंड लेने से ही रोगी को फायदा होता है. और आपको कुछ मालिश करने के लिये तेल मंदिर से आपको दिए जायेंगे वो तेल मरीज को डेली दिन में दो या तीन बार मालिश करना रहेगा और बाबा श्री चतुरदासजी महाराज का नाम लेते रहना चाहिए.

सात दिनों तक परिक्रमा हवन कुंड भभुती लगाने से लकवा ग्रस्त रोगी के धीरे धीरे हाथ और पैर हीलना चालू हो जायेगें लकवा के मरीजों को डॉक्टर भी यहां भेजते हैं. लेकिन आपको मंदिर के नियम पुरी तरह से मानना होगा तो ही फर्क पड़ता है.

दोस्तों यह बात बिल्कुल सत्य है अगर आपके भी किसी जान पहचान या रिश्तेदार में कोई लकवा ग्रस्त है. तो एक बार जरूर बुटाटीधाम पर लेकर आऐ आपको कुछ भी साथ में लेकर नहीं आना है. मंदिर ट्रस्ट द्वारा सब सुविधा उपलब्ध करवा दी जाती है. अगर आपको फायदा हुवा तो आपकी इच्छा अनुसार भेंट या दान कर सकते हैं.

इस मंदिर मे बिमारी का इलाज ना तो कोई पंडित करता है और ना कोई वैद या हकिम  यहाँ चलती है तो केवल और केवल मंदिर के परिक्रमा और हवन कुंड भभुति लगाने से

केसे होता है चमत्कार :>>कहते हैं 500साल पहले यहां एक संत बाबा चतुरदास के नाम से हुवा करता था. उन्होंने रोगों के मुक्त के लिये यज्ञ किया और तपस्या की और बाद में यहां समाध ले ली तब से बाबा श्री चतुरदास जी महाराज के समाधि स्थल के परिक्रमा लगाने से लकवा ग्रस्त रोगी पुरी तरह तैयार हो जाते हैं.
दोस्तों यह पोस्ट मेनें वहां मेरी आंखों के सामने देखने के बाद किया है लकवे (पैरालिसिस ) पुरी तरह से निवारण होता है. अगर किसी को लकवा होने के 4-5 दिनों में पहली वहां चले जाने पर इलाज बहुत जल्दी हो जाता है. राजस्थान से बहार से आने वाले लोगों के लिए भी ट्रेन का बहुत अच्छा साधन है. जोधपुर और जयपुर के बीच मेङता से15 किलोमीटर दूर रेण गांव का स्टेशन पडता है जो बुटाटीधाम से 20 किलोमीटर दूर है.
 
'' कर भला तो हो भला ''

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